Festival Season Shayari & Story

Desh Bhakti Kavita in Hindi – देशभक्ति कविताएँ बच्चों के लिए 2019

Desh Bhakti Kavita in Hindi 2019: गणतंत्र दिवस 2019 ( 26 जनवरी 2019) आने में कुछ ही दिन बचे है और हमारे भारत देश के स्कूल के बच्चों को गणतंत्र दिवस पर कविताएं यानी कि हमारे देश भक्तों के ऊपर कविताएं लिखनो को स्कूल में दी जाती है। आज हम आपके सामने ऐसे ही कुछ देशभक्ति कविताएं आपके साथ में पेश कर रहे हैं जिन्हें आप अपने स्कूल में शेयर कर सकते हैं।

Desh Bhakti Kavita

Desh Bhakti Kavita in Hindi – देशभक्ति कविताएँ बच्चों के लिए 2019

इन कविताओं को इन कक्षाओ वालों को जरूरत जरूर पड़ती है जैसे की कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8,9 व 10 के विद्यार्थियों ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं इन कविताओं के जरिए से, तो अभी नीचे से कविताएं देशभक्ति पढ़ सकते हैं। जो कविताएं मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं जो उनको पढ़कर आपके अंदर भी देशभक्ति के लिए भावना जाग उठेगी आप भी इन कविताओं के जरिए अपने भारत देश के प्रति अपना प्यार सम्मान जाहिर कर पाएंगे। आईये देखते हैं कुछ देशभक्ति कविताएं।

देशभक्ति कविताएँ हिंदी में – Desh Bhakti Kavita in Hindi 2019 

The country’s devotional poems are in Hindi. Apart from this, you can also see patriotic pom in Hindi. For children of Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 1, Class Class, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12, Class 12, here we have 2009 , 2010, 2011; According to 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017, 2018 and 2019, poetry is shown on 15th August independence day.

आज़ादी-इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,

इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं।
हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं।

कभी आज़ाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैं।
मगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैं।

असीराने-क़फ़स से काश, यह सैयाद कह देता,
रहो आज़ाद होकर, हम तुम्हें आज़ाद करते हैं।

रहा करता है अहले-ग़म को क्या-क्या इंतज़ार इसका,
कि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैं।

यह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कै़दे-उल्फ़त में,
वो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं।

सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी,
वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं।

यह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करते,
हमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?

कोई बिस्मिल बनाता है, जो मक़तल में हमें ‘बिस्मिल’,
तो हम डरकर दबी आवाज़ से फ़रियाद करते हैं।
16. देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे

देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे
मरते मरते देश को जिन्दा मगर कर जायेंगे

आज़ादी-इलाही ख़ैर

हमको पीसेगा फलक चक्की में अपनी कब तलक
खाक बनकर आंख में उसकी बसर हो जायेंगे

कर वही बर्गें खिगा को बादे सर सर दूर क्यों
पेशबाए फस्ले गुल है खुद समर कर जायेंगे

खाक में हम को मिलाने का तमाशा देखना
तुख्मरेजी से नये पैदा शजर कर जायेंगे

नौ नौ आंसू जो रूलाते है हमें उनके लिये
अश्क के सैलाब से बरपा हश्र कर जायेंगे

गर्दिशे गरदाब में डूबे तो परवा नहीं
बहरे हस्ती में नई पैदा लहर कर जायेंगे

क्या कुचलते है समझ कर वह हमें बर्गे हिना
अपने खूं से हाथ उनके तर बतर कर जायेंगे

नकशे पर है क्या मिटाता तू हमें पीरे फलक
रहबरी का काम देंगे जो गुजर कर जायेंगे.

बेटी पर कविताएं

बेटी बचाओ कविताबेटी जग का आधारजब माँ हीं जग में न होगीतो तुम जन्म किससे पाओगे ?……..जब बहन न होगी घर के आंगन मेंतो किससे रुठोगे, किसे मनाओगे ?………जब दादी-नानी न होगीतो तुम्हें कहानी कौन सुनाएगा ?…जब कोई स्वप्न सुन्दरी हीं न होगी
तो तुम किससे ब्याह रचाओगे ?……
जब घर में बेटी हीं न होगी
तो तुम किस पर लाड लुटाओगे ?…..
जिस दुनिया में स्त्री हीं न होगी
उस दुनिया में तुम कैसे रह पाओगे ?……
जब तेरे घर में बहु हीं न होगी
तो कैसे वंश आगे बढ़ाओगे ?…..
नारी के बिन जग सूना है
तुम ये बात कब समझ पाओगे ?!

उठो सोने वालों

उठो सोने वालों, उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।वतन के फ़क़ीरों का फेरा हुआ है।।उठो अब निराशा निशा खो रही है
सुनहली-सी पूरब दिशा हो रही है
उषा की किरण जगमगी हो रही है
विहंगों की ध्वनि नींद तम धो रही है
तुम्हें किसलिए मोह घेरा हुआ है
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।।

उठो बूढ़ों बच्चों वतन दान माँगो
जवानों नई ज़िंदगी ज्ञान माँगो
पड़े किसलिए देश उत्थान माँगो
शहीदों से भारत का अभिमान माँगो
घरों में दिलों में उजाला हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।

उठो देवियों वक्त खोने न दो तुम
जगे तो उन्हें फिर से सोने न दो तुम
कोई फूट के बीज बोने न दो तुम
कहीं देश अपमान होने न दो तुम
घडी शुभ महूरत का फेरा हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।

हवा क्रांति की आ रही ले उजाली
बदल जाने वाली है शासन प्रणाली
जगो देख लो मस्त फूलों की डाली
सितारे भगे आ रहा अंशुमाली
दरख़्तों पे चिड़ियों का फेरा हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।

स्वतन्त्रता दिवस

आज से आजाद अपना देश फिर से!

ध्यान बापू का प्रथम मैंने किया है,
क्योंकि मुर्दों में उन्होंने भर दिया है
नव्य जीवन का नया उन्मेष फिर से!
आज से आजाद अपना देश फिर से!

दासता की रात में जो खो गये थे,
भूल अपना पंथ, अपने को गये थे,
वे लगे पहचानने निज वेश फिर से!
आज से आजाद अपना देश फिर से!

स्वप्न जो लेकर चले उतरा अधूरा,
एक दिन होगा, मुझे विश्वास, पूरा,
शेष से मिल जाएगा अवशेष फिर से!
आज से आजाद अपना देश फिर से!

देश तो क्या, एक दुनिया चाहते हम,
आज बँट-बँट कर मनुज की जाति निर्मम,
विश्व हमसे ले नया संदेश फिर से!
आज से आजाद अपना देश फिर से!
आजाद हिन्दुस्तान का आह्वान!

कर रहा हूँ आज मैं आज़ाद हिंदुस्तान का आह्वान!

है भरा हर एक दिल में आज बापू के लिए सम्मान,
हैं छिड़े हर एक दर पर क्रान्ति वीरों के अमर आख्यान,
हैं उठे हर एक दर पर देश-गौरव के तिरंग निशान,
गूँजता हर एक कण में आज वंदे मातरम का गान,
हो गया है आज मेरे राष्ट्र का सौभाग्य स्वर्ण-विहान;
कर रहा हूँ आज मैं आज़ाद हिंदुस्तान का आह्वान!

याद वे, जिनकी जवानी खा गई थी जेल की दीवार,
याद, जिनकी गर्दनों ने फाँसियों से था किया खिलवार,
याद, जिनके रक्त से रंगी गई संगीन की खर धार,
याद, जिनकी छातियों ने गोलियों की थी सही बौछार,
याद करते आज ये बलिदान हमको दुख नहीं, अभिमान,
है हमारी जीत आज़ादी, नहीं इंग्लैंड का वरदान;
कर रहा हूँ आज मैं आज़ाद हिंदुस्तान का आह्वान!

उन विरोधी शक्तियों की आज भी तो चल रही है चाल,
यह उन्हीं की है लगाई, उठ रही जो घर-नगर से ज्वाल,
काटता उनके करों से एक भाई दूसरे का भाल,
आज उनके मंत्र से है बन गया इंसान पशु विकराल,
किन्तु हम स्वाधीनता के पंथ-संकट से नहीं अनजान,
जन्म नूतन जाति, नूतन राष्ट्र का होता नहीं आसान;
कर रहा हूँ आज मैं आजाद हिंदुस्तान का आह्वान!

जब बंधे थे पाँव तब भी हम रुके थे हार कर किस ठौर?
है मिटा पा.. !

15 अगस्त 1947

आज जीत की रात
पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना

प्रथम चरण है नये स्वर्ग का
है मंज़िल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रत्न-हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन-मुक्ता-डोर
क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की
विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि समान रहना।

विषम शृंखलाएँ टूटी हैं
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग-बंदिनी हवाएँ
प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं
यह सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएँ
उठता है तूफान, इंदु! तुम
दीप्तिमान रहना।

ऊंची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से है मृत समाज
कमज़ोर हमारा घर है
किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी
यह विश्वास अमर है
जन-गंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
पहरुए! सावधान रहना।।

Valentine Week All Shayari List in Hindi 2019

  1. गुलाब दिवस पर शायरी – Rose Day Shayari in Hindi
  2. प्रपोज डे पर शायरी – Happy Propose Day Shayari in Hindi
  3. चॉकलेट डे पर शायरी – Chocolate Day Shayari in Hindi
  4. टेडी डे पर शायरी – Teddy Day Shayari in Hindi for Bear Day
  5. प्रॉमिस डे पर शायरी – Happy Promise Day Shayari For Girlfriend & Boyfriend
  6. हग डे पर शायरी – Hug Day Shayari in Hindi
  7. प्यार भरी शायरी किस डे पर हिंदी में – Happy Kiss Day Shayari in Hindi
  8. वैलेंटाइन डे पर शायरी – Valentine Day Shayari in Hindi

उम्मीद करता हूं दोस्तों यह देशभक्ति कविताएं आपको जरूर पसंद आई होंगी अगर यह देशभक्ति कविताएं आपको पसंद आई है तो अभी सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसे ही लेटेस्ट आर्टिकल पाने के लिए हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब जरूर करें। !

Tags: Desh Bhakti Kavita in Hindi, Desh Bhakti Kavita in Hindi 2019, Desh Bhakti Kavita 2019, 2019 Desh Bhakti Kavita in Hindi, Desh Bhakti Kavita top, Desh Bhakti Kavita 2018

About the author

Nazir Husain

Hello friends My name is Nazir Husain and My blog is Online Hindi Points . I share my knowledge in Hindi on this blog . I live in India and I want to do some kind of help for the people of india. If you liked our website,Definitely share this blog with your friends .

Leave a Comment

%d bloggers like this: