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15 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है ‘स्वतंत्रता दिवस’

भारत में रहने वाले को 15 अगस्त हर व्यक्ति के लिए बहुत मायने रखता है। हर साल इस राष्ट्रीय पर्व को हम हर साल मनाते हैं। इससे जुड़े इतिहास से भारत में पता नहीं कोई अनजान ही होगा जो इसके बारे में जानता नहीं होगा भारत का हर व्यक्ति जानता होगा कि कैसे हमें आजादी मिली और कैसे अंग्रेजों की हुकूमत का अंत हुआ। बावजूद इसके इस दिन से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं जिनको जानना बहुत ही जरूरी होगा। तो चलते हैं 15 August kyu manate hai राष्ट्रीय पूर्व की जानने की कोशिश करते हैं। और इतिहास के उन पत्रो से धूल हटा सकें जिन्हें भूल से भी हमने कभी खोलने की कोशिश भी नहीं करी है।

15 अगस्त

आपसे निवेदन है अगर आप इस पोस्ट को पढ़ रहे है तो ध्यान से पढ़ें और अपने दिमाग में इसे बैठार ले क्योकि भारत में रहने वालों के लिए बहुत जरूरी होता है कि अपने देश के इतिहास को जाने। अगर अपने देश से प्यार करते हो तो इस पोस्ट को Share करो और इसको Subscribe करो। क्योकि आपने तो अपने देश की 15 अगस्त की इतिहास जान लिया आप दूसरों की भी बताओ और बताने का सबसे बढ़िया आईडिया है कि इस पोस्ट को Share करें। सबसे Best तरीका है। पहुचाने का तो अगले पड़ते है।

अंग्रेजों के कदम लड़खड़ा क्यों गए थे

आजादी के इतिहास को जाने के लिए हमें कुछ 15 अगस्त 1947 से थोड़ा और पीछे जाना पड़ेगा। दूसरा विश्व युद्ध किया तो समूचे विश्व के लिए ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा, मगर ब्रिटेन सरकार को इसे नुकसान थोड़ा ज्यादा हुआ था। दरअसल यह दूसरे विश्वयुद्ध के सैलाब में कई सारे ब्रिटिश सैनिक और पैसा दोनों ही डूबे गए थे। लेकिन अब हालात बिगड़ते जा रहे थे कि भारत के लोग अंग्रेजों की मनमानी को खत्म करने के इरादे में पूरी तरह से जुट गए थे। और भारत के लोग चाहते थे कि अंग्रेजों को खत्म कर दिया जाए और उन्हें भगा दिया जाए। और हमारा भारत आजाद हो जाए। इसलिए अंग्रेजों के हाथों से भारत पूरी तरह से फिसलता जा रहा था।

अंग्रेज लोग समझने लगे थे कि अब हमारा राज नहीं बचेगा। जहां एक तरफ खौफ में आकर काफी सारे ब्रिटिश अधिकार वापस अपने पहले बाले देश में भाग चुके थे, वहीं दूसरी तरफ ब्रिटिश हुकूमत विश्वयुद्ध के कारण बहुत कुछ खो चुके थे। उनके पास सैनिक बहुत कम हो गए थे और बो लोग घबराने लगे थे और उनके पास इतनी ताकत ही नहीं बची थी कि वह भारत जैसे बड़े देश शासन कर पाते। उन्हें इस बात का एहसास हो चुका था कि वह ज्यादा दिनों तक अब भारत को गुलाम नहीं रख सकेंगे ।इसलिए वह सोचने लगे थे कि अब अपने देश वापस जाना पड़ेगा।

परिस्थितियों के बारे में जान गई थी ब्रिटिश हुकूमत

माना जाता है कि 1946 से ही भारत में हिंदू और मुस्लिम के बीच एक लड़ाईयां शुरू हो गई थी। जगह-जगह दंगों की बहुत शरुआत होने लगी थी, तो तत्कालीन हुकूमत के खिलाफ आक्रोश बहुत बढ़ता ही जा रहा था। अंग्रेजों ने इसको रोकने की बहुत कोशिश की थी लेकिन वो नाकामयाब रहे। उनका कोई भी पॉइंट काम नहीं कर रहा था। उल्टा भारतीय लोगों के क्रांति के जलवा तेज हो रहे थी। अंग्रेजों के खुद के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था ओवर ऐसी हालत अंग्रेजों के समझने से परे था। वह मजबूर हो चुके थे भारत को आजाद करने के लिए।

उन्हें इस बात का पूरा एहसास हो चुका था कि अब वह भारत में कुछ नहीं कर सकते। इसी के बीच देश में बंटवारे की चर्चाएं भी शुरू हो चुकी थी। अंत मे अंग्रेजों को अपने घुटने टेकने ही पढ़े और उन्होंने भारत को आजाद करने का भी ऐलान कर दिया। भारत की आजादी का यह फैसला पार्लियामेंट में लिया गया। ब्रिटिश पूरी तरह से भारत को आजाद करने के लिए तैयार हो गए थे। बस उन्होंने इसके लिए जून 1948 तक की मोहलत मांगी।

15 August kyu

लुईस माउंटबेटन भारत क्यों आया था

ब्रिटिश सरकार जब तक अपनी सारी ताकत भारत को देने के लिए तैयार पूरी तरह से हो गई थी, तब तक उनके आला अधिकारी अपने देश वापस पूरी तरह से लौट चुके थे। अंत में लुईस माउंटबेटन को अंग्रेजो के बीच शासनकाल को खत्म करने की पूरी जिम्मेदारी दे दी गई थी। लुईस माउंटबेटन को तब तक भारत में रोकना था।

जब तक भारत अपने पैरों पर पूरी तरह से फिर से खड़ा न हो जाए। लुईस माउंबेटन उस समय दोनों तरफ से पूरी सरकार थे। लुईस माउंटबेटन जब भारत में आए थे उस समय हिंदू और मुस्लिम लड़ाई काफी फैल चुकी थी काफी तादाद से लोग मारे जा रहे थे। कई बेघर हो रहे थे।

भारत की पूरी जिम्मेदारी लुईस माउंटबेटन के कंधों पर रख दी थी। उनकी जिम्मेदारी थी कि वह इन दोनों दंगों को खत्म कराएं मगर लुईस माउंटबेटन ने अपना सारा जोर पूरी तरह से लगा दिया था। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए, सभी प्रयास असफल रहे। देखते ही देखते भारत में पूरी तरह से युद्ध छिड़ गया था। लोग तेजी से एक दूसरे को कत्ल करने लगे थे। लेकिन स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो चुके थे। लुईस माउंटबेटन को समझ में नहीं आ रहा था कि मैं अब की करू।

लुईस माउंटबेटन समझने लगा था कि अब मेरी जान का पूरा खतरा है। और ऊपर से भारत में दंगे बढ़ते ही जा रहे थे। जल्दी जल्दी मैं लुईस माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को आखिर भारत को आजाद कर ही दिया। लुईस माउंटबेटन को लगा था कि यह खबर दंगों को खत्म पूरी तरह से कर ही सकती है, लेकिन उसका यह दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया।

लुईस माउंटबेटन को गलती कैसे महसूस हुई

माउंटबेटन ने कह तो दिया था कि 15 अगस्त 1947 को भारत को आजाद कर दिया जाएगा मगर उनका सोचा-समझा फैसला नहीं था यह इतना आसान नहीं था जितना आसान माउंटबेटन सोच रहा था उतना आसान नहीं था । लेकिन बात तो यह है कि माउंटबेटन खुद जल्द से जल्द भारत से अपने देश जाना चाहता था।

एक किताब फ्रीडम एट मिडनाइट में माउंटबेटन ने बताया कि 15 अगस्त तारीख उन्होंने गलती से बोल दिए थी। माउंटबेटन ने 15 अगस्त को इसलिए चुना था क्योंकि 15 अगस्त को जापान के आत्मसमपर्ण की दूसरी वर्षगांठ थी। माउंटबेटन को यह बात इसलिए याद थी क्योंकि जापान के आत्मसमपर्ण के समय बहे एक दिन मौजूद थे। इसके बाद लईस माउंटबेटन ने आजादी का पूरा बिल पार्लियामेंट में रखा जिसे जल्दी ही पास कर दिया गया।

भारत आजादी के लिए पूरी तरह से तैयार खड़ा था। भारत को उसकी सारी ताजा सौंपी गई और रात के जिस वक्त 12:00 बज रहे थे उसके बीच पूरे भारत मैं आधा भारत सो रहा था। उसी समय भारत को आजाद पूरी तरह से किया गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर जाकर तीन रंगों से सजे भारतीय तिरंगों को पहली बार लाल किले के ऊपर झंडा लहराया था। तो इसी समय जे भारत को पूरी तरह से आजादी मिली गई थी।

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भारत में रहने वालों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें

हम सब कभी भी भगत सिंह और खुदीराम बोस और चंद्रशेखर आजाद को नहीं भूल सकते हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने देश के लिए जान गवा दी। हम नेताजी और गांधीजी संघर्षों को कैसे दरकिनार कर सकते हैं गांधी जी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीयों को एहसास का पाठ पढ़ाया था। वह एक ऐसे नेता थे जिन्होंने एहसास के माध्यम के आज़ादी का रास्ता दिखाएं और अनंत लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को वह दिन आया जब भारत को आजादी मिली।

जितने भी लोग भारत में रहते हैं सबकी मातृभूमि है हम सब इसके नागरिक हैं। हम सबको हमेशा इसको बुरे लोगों से बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह हम सब की जिम्मेदारी है कि हम अपने देश को आगे की ओर नेतृत्व करें। और हम सब अपने भारत को एक दुनिया का सबसे अच्छा और खूबसूरत देश बनाएं। हर साल राजपथ पर नई दिल्ली में लाल किले पर एक बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है। जहां पर भारत बड़े-बड़े नेता प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अन्य नेता मौजूद होते हैं। और यहां और यहां प्रधानमंत्री द्वारा झंडा फहराया जाता है।

इसके बारे में और जाने

झंडे के बाद राष्ट्रीय गान गाया जाता है। और राष्ट्रगान के साथ 21 बंदूकों की सलामी और हेलीकॉप्टर से तिरंगे पर फूलों की बारिश की जाती है। और पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। भारत में रहने वाले स्कूल, कार्यालय और समाज के सभी जने अपने कार्यालय मैं झंडा फहराया कर मनाते हैं। हम सबको भारतीय होने पर गर्व करना चाहिए और अपने देश को एकता को सदा बरकरार रखना चाहिए। और अपने भारत में रहने वाले हिंदू – मुस्लिम सब भाई- भाई मिलकर रहने एकता करना चाहिए।

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Nazir Husain

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