How To Choose कोर्स & कॉलेज ? in Hindi

दोस्तों Linksjoin में आपका स्वागत है। दोस्तों आज हम बात करेंगे कि [ How To Choose Course & College? in hindi 2020 ]  है और हम इन्हीं के बारे में बात करेंगे और इस ब्लॉक पर आपको नए तरीके हिंदी में मिलेंगे . तो आप दिल्ली हमारी वेबसाइट  को Google  पर www.Linksjoin.com search  करके हमारे ब्लॉग पर आते रहे  और अब बात करते हैं . कि  बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट का जिस बेसब्री से स्टूडेंट इंतजार करता है , उनमें उतनी ही कुलबुलाहट है या बेचैनी इस बात को लेकर भी है।

कि रिजल्ट के बाद आगे क्या ? स्क्रीन की स्टूडेंट अपने तरीके से सोच रहे होते हैं , इनमें कुछ का विजन क्लियर होगा और टारगेट फिक्स , जबकि कई  इस उधेड़बुन में होंगे कि कौन सा कोर्स सेलेक्ट करूं जिसमें पढ़ाई के बाद जॉब की गारंटी सौ प्रतिशत हो |

How To Choose Course and College?

दोस्तों कुछ कह रहे होंगे तो parents   कुछ और राय दे रहे होंगे | लेकिन पढ़ाई आपको करनी  है, इसलिए फैसला भी आप  ही करें  गेंद आपके पूल में है खुद को तलाश से और मजबूती से बढ़ाएं कदम  दरअसल ,  स्थान तो बहुत खुल गया है , लेकिन ज्यादातर कालेजों दोबारा ना तो क्वालिटी फैकल्टी उपलब्ध कराई जाती है और ना ही  प्लेसमेंट की  तो खैर पूछिए ही मत  लिहाजा , कोर्स कंप्लीट करने के बाद स्टूडेंट नौकरी के लिए भटकते रहते हैं।  आपके साथ ऐसा ना हो इसलिए समय रहते फैसला कर ले  के करियर की लिहाज  कौन सा कोर्स और  कॉलेज सेलेक्ट करना बेहतर होगा।

Choose कोर्स & कॉलेज

और  हर पढ़ने वाला स्टूडेंट 10th  और 12th  के बाद एक ऐसे मोड़ पर होता है जहां कंफ्यूजन ही कंफ्यूजन होता है क्योंकि अब उसके सामने बहुत से रास्ते होते हैं और बहुत सी मंजिल भी।  वह  क्या करें , क्या ना करें   वह बहुत कुछ सोचता है और कई बार किसी के कहने या खुद से ही जल्दबाजी में एक ऐसा निर्णय लेता है  की  बाद में उसे लगता है यह क्या मैं तो गलत ट्रैक पर हूं  इस पर तू मेरी मंजिल है नहीं पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है अब उसके पास निराश के अलावा कुछ नहीं होता है

हो सके तो दसवीं से बारहवीं तक अपनी मंजिल को पहचान ले और चलने पर उसे चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और उन्हीं के अनुसार चुनाव करना चाहिए  तो जानते हैं कौन सी  जरूरी बातें हैं  जो आपका कैरियर सही कर दे।

कैसे कालेज को चुने

कहीं भी एडमिशन से पहले  उसकी डिटेल्स जान ले कि वह  ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन  या UGC (  यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ) से मान्यता प्राप्त है या नहीं फैकल्टी के बारे में फास्ट हैंड इंफॉर्मेशन वहां के इंडस्ट्रीज से हासिल करें  उनसे इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की जानकारी के बारे में पूरा जाने  और सिर्फ कॉलेज की वेबसाइट पर भरोसा ना करके और भी जहां से जानकारी मिल पाए एकत्रित करें।  और कॉलेज के आसपास के लोगों से कॉलेज की पूरी जानकारी लें।

लक्ष्य बनाएं

विषय चुनने से पहले आपको लक्ष्य बना लेना चाहिए कि मुझे भविष्य में क्या बनना है। इसके बाद विषय चुनना चाहिए इससे आपको आसानी हो जाएगी बाद में उसी लक्ष्य के पीछे जी तोड़ मेहनत से लग जाए और सबसे पहली बात यह है दसवीं और बारहवीं में से पहले आपको अपना लक्ष्य चुनना चाहिए।

खुद पर रखें भरोसा

जीवन में सफल होना है। तो खुद पर भरोसा रखें इसके बाद विषय चुने अगर कोई मुश्किल हो और कुछ समझ ना आए तो धैर्य से काम लें और शांत मन से सोचें हल जरूर निकलेगा और कोई भी काम करने से पहले उसे सोच समझ कर काम करना चाहिए।

कोर्स का सिलेक्शन कैसे करें

आज तमाम छोटे-बड़े गवर्नमेंट और प्राइवेट इंस्टिट्यूशन मैं भी वितरित तरह के कोर्सेज अवेलेबल है लेकिन 12वीं के बाद कोर्स चुनना एक स्टूडेंट के  इंटरेस्ट और ऑप्शन पर डिपेंड करता है।  अगर आप आर्टिस्टिक या  क्रिएटिव है तो एडवरटाइजिंग, डिजाइन, फैशन जैसे कोर्सेज चुन सकते हैं  वहीं  एनालिटिकल सोचते हैं। उनके लिए इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र हैं  यहां बहुत सारे स्पेशलाइज्ड कोशिश भी है जिन्हें करने के बाद करियर में ऊंची उड़ान भर सकते हैं।

ऐसे में स्टूडेंट जब भी किसी खास कोर्स या प्रोग्राम में  एनरोल कराने जाए तो एक बात क्लियर रखें कि उस प्रोग्राम को सेलेक्ट करने का उनका मकसद है।  या  पर्पस क्या है ?  फिर भी  अगर कंफ्यूजन बना रहे , तू अपना प्रोफाइल टेस्ट कराएं इससे आपको अपनी स्ट्रेट का पता लग सकेगा और आप उसके मुताबिक को सेलेक्ट कर सकेंगे।

कॉलेज का सिलेक्शन कैसे करें

स्टूडेंट जब भी किसी कॉलेज  या  इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने की सोच , उन्हें पहले यह पता कर लेना चाहिए कि उस स्थान को समुचित रेगुलेटरी अथॉरिटी से मान्यता हासिल है या नहीं।  जैसे  technical  institutes  ऑल इंडिया काउंसिल फॉर  टेक्निकल एजुकेशन से मान्यता लेना होती है  इसी तरह UGC  , MCI  आदि भी रेगुलेटरी बॉडीज है। अगर प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लेने जा रहे हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें ?

1 क्वालिटी ऑफ फैकल्टी
 2  फैकल्टी रिसर्च
 3   प्रोफेसर ,  लेक्चर और असिस्टेंट प्रोफेसर को रेश्यो
 4    करिकुलम डाइवर्सिटी एंड  अपडेशन
 5   प्लेसमेंट
कॉलेज में पढ़ाई की क्वालिटी का अंदाज वहां की फैकल्टी से लगाया जा सकता है। अगर कंप्यूटर साइंस कोर्स करना चाहते हैं। तो यह देखना जरूरी है। कि  said  संस्थान में कितनी क्वालिफाइड फैकल्टी  यानी एमसीए या एमटेक  holders  है। यह जानकारी वेबसाइट के बजाय कॉलेज जाकर या वहां के स्टूडेंट से बात  कर हासिल की जा सकती है।  जैसे क्या फैकल्टी  बाह  रेलवे Employee है। गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम कर रहे हैं।

प्लेसमेंट चेक करें

अमूमन कोई भी प्रोफेशनल कोर्स करने के पीछे स्टूडेंट्स का  मकसद सही जगह पर प्लेसमेंट हासिल करना होता है।  कॉलेज प्लेसमेंट सेल होने का  तो दावा करते हैं। लेकिन IIT आई आई एम जैसे कुछ के बड़े संस्थानों को छोड़कर अधिकांश का प्लेसमेंट रिकॉर्ड अच्छा नहीं होता है। इसलिए कोर्स और कॉलेज जाने से पहले यह मालूम कर ले कि किस कोर्स के स्टूडेंट्स का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा  रहा है प्लेसमेंट के दौरान कौन सी कंपनी ने पार्टिसिपेट किया है , तो इसकी जानकारी भी आपके पास होनी चाहिए।

इंजीनियरिंग ब्रांच ?

आपको 12th में चाहे कितने ही अच्छे अंक क्यों ना मिली हो , लेकिन अगर आईआईटी एनआईटी में दाखिला नहीं मिल  पता सही इंजीनियरिंग कॉलेज का चुनाव करना मुश्किल हो जाता है।  क्योंकि मार्केट में आए दिन नए प्राइवेट इंजीनियर कॉलेज खुल रहे हैं इससे नींद जरूरी है कि आप पहले खुद को काउंसलिंग के लिए तैयार करें  रैंक के अनुसार अपने priorities  तय कर ली IIT में स्टूडेंट्स को काउंसलिंग के दौरान ही इंजीनियरिंग के विभित्र ब्रांचेज की जानकारी दे दी जाती है  इंजीनियरिंग ब्रांच में सबसे अच्छी रैंक होना चाहिए

दोस्तों की तरफ ना देखें

हो सकता है। कि आपके किसी दोस्त ने कोई अन्य विषय लिया हो आप भी अपना मन मार कर  विषय सिर्फ इसलिए ले रहे हैं  जिससे दोस्त का साथ न छूट जाए लेकिन याद रखें कि सवाल आपके कैरियर का है।  इसलिए बेहतर है। दोस्त का साथ छोड़ कर अपनी क्षमता देखें। क्योंकि  अगर अपने दोस्त के साथ बहे विषय ले लिया है। बाद में  वह तो पास हो कर आगे निकल जाएगा आप पीछे ही रह जाएंगे इसलिए आप अपने दोस्तों का पीछे छोड़ दें और अपने कैरियर की तरफ देखें दोस्त अगले भी बन सकते हैं।

सिलेबस छोटा या बड़ा

ऐसा कहते हैं। कि सिलेबस सिविल सेवा के परीक्षार्थियों के लिए एक धार्मिक ग्रंथ है। विषय चयन करने के पहले एक बार हर विषय के सिलेबस पर नजर दौड़ा लेने में ही समझदारी है संस्कृत और पाली का सिलेबस सबसे छोटा है।  यदि आपको इन विषयों पर पकड़ है। तो आप  बेहिचक इन  विषय का चुनाव कर सकते हैं पर यह भी ध्यान रखें कि इन विषयों पर पकड़ बनाने के लिए आप को गुरु/ गाइडेंस की आवश्यकता पड़ेगी।

विषय चयन में गुरु/ गाइडेंस (guidance)  की भूमिका 

अधिकांश देखा जाता है।  कि परीक्षार्थियों के परिवार में कोई भी ऐसा सदस्य नहीं होता है जो राज्य  केंद्रीय सिविल सेवाएं में कार्यकर्ता  या पद स्थापित है। दूर से दूर के रिश्तेदार में भी कोई गाइड करने वाला नहीं मिलता ऐसे में उन्हें ट्यूशन कॉमा कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है।

इसलिए विषय चयन  के समय यह भी ध्यान रखना आवश्यक है।  कि आपके रिश्तेदार कोई घर का बड़ा कोई आपके आस-पास ऐसा  इंसान या गुरूर है। या नहीं जो आपको उस विषय को पढ़ाने में संयोग मात्र कर सके क्योंकि   शून्य से शुरुआत करने में आपका समय भी बर्बाद होगा और आप के लिए यह कठिन भी होगा।

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पर यह भी ध्यान रखें आपको पढ़ना शुभम है। गुरुजन आपको मात्र उत्साहित और आप के विषय की  कि नींद को मजबूत करेगी सारी तैयारी आपको करनी है परीक्षा केंद्र में आप जाएंगे ना कि गुरु इसलिए यदि उड़ नहीं पा रहे हैं। तो  दौड़ नहीं पा रहे हैं तो चलिए  चल नहीं पा रहे हैं तो लेट कर  किसके मगर जो भी कर रहे हैं उसका उद्देश्य मात्र आगे बढ़ने के लिए होना चाहिए।

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